VIDEO: शिवम दुबे ने तोड़ी ट्रेन में सफर करने पर चुप्पी, बोले- 'आपको वो ट्रेन वाली स्टोरी पता चली होगी'

 


भारत के टी-20 वर्ल्ड कप विनर शिवम दुबे ने न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल जीतने के बाद अहमदाबाद से मुंबई तक ट्रेन में सफर किया था जिसके बाद वो सुर्खियों में आ गए थे और अब उन्होंने सामने आकर खुद इस मामले पर पहली बार चुप्पी तोड़ी है। दुबे ने बताया कि उन्होंने ये फैसला इसलिए लिया था क्योंकि फ्लाइट्स पूरी तरह बुक थीं और वो जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहते थे ताकि अपने चार साल के बेटे अयान और दो साल की बेटी मेहविश से मिल सकें।

इस समय सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें देखा जा सकता है कि दुबे बताते हैं कि आखिर उन्होंने ट्रेन से सफर करने का फैसला क्यों किया? दुबे ने कहा, मुझे बहुत ज्यादा एंजाइटी हो रही थी कि मैं मेरे पाप और बच्चे को मिलूं। आपको वो स्टोरी पता चली होगी ट्रेन वाली, तो यही वजह थी मेरे घर जल्दी आने की क्योंकि मेरी जो लाइफ रही है, ऊपर वाले के बाद अगर मैं किसी को थैंक यू बोलता हूं तो वो मेरे पापा हैं। उन्होंने जो किया है मेरे लिए वो बहुत महत्वपूर्ण है। इसीलिए जब मैं आया तो सबसे पहले उनसे मिला और उन्हें मेडल पहनाया और बच्चों से मिला।"

इससे पहले द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, दुबे ने बताया कि उन्होंने ट्रेन का सफर क्यों चुना था। दुबे ने कहा, "कोई फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी, इसलिए मैंने सुबह जल्दी अहमदाबाद से मुंबई के लिए ट्रेन लेने का फैसला किया। हम सड़क के रास्ते भी जा सकते थे लेकिन ट्रेन ज़्यादा तेज़ थी। मैंने, मेरी पत्नी और एक दोस्त ने ट्रेन से जाने का फैसला किया। 3rd AC के टिकट मिल रहे थे, इसलिए हमने उन्हें बुक करने का फैसला किया। हमने जिससे भी बात की, परिवार और दोस्त, सब परेशान थे। क्या होगा अगर किसी ने मुझे स्टेशन पर या ट्रेन के अंदर पहचान लिया?"

उन्होंने आगे बोलते हुए कहा, "मैंने एक कैप, एक मास्क और एक फुल-स्लीव टी-शर्ट पहनी थी। ये सुबह 5.10 बजे की ट्रेन थी, इसलिए हमें उम्मीद थी कि प्लेटफॉर्म पर ज़्यादा लोग नहीं होंगे। तो मैंने अपनी पत्नी से कहा कि मैं ट्रेन छूटने से पांच मिनट पहले तक कार में इंतज़ार करूंगा। उसके बाद, मैं जल्दी से ट्रेन में चढ़ जाऊंगा। रात में, मैं बर्थ से उतरा लेकिन वॉशरूम जाते और वापस आते समय किसी ने मुझे नहीं पहचाना। ट्रेन का सफ़र आराम से चला लेकिन मुझे बोरीवली में दिन के उजाले में उतरने की चिंता थी। मैं वहां ध्यान से बच नहीं सकता था।"

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