दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको क्रिकेट की एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना के बारे में बताने वाले हैं, जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था।
इतिहास में क्रिकेट जितना शांत और
जेंटलमैन गेम माना जाता है, उतने
ही बड़े-बड़े झगड़े भी यहाँ होते रहे हैं।
हरभजन और श्रीसंत का थप्पड़ क़िस्सा आपने सुना होगा… लेकिन
दोस्तों, 1981 में जो हुआ, वो उससे भी कई गुना ज्यादा डरावना और
विवादित था।
ये क़िस्सा है दो दिग्गजों— डेनिस लिली और जावेद
मियांदाद—का, और आज भी इसे क्रिकेट इतिहास की सबसे
खराब लड़ाइयों में गिना जाता है।
चलिए शुरू से जानते हैं पूरा मामला।
🏏 पर्थ का टेस्ट… जहाँ सब शुरू हुआ
साल था 1981। जगह थी ऑस्ट्रेलिया का तेज़ उछाल वाला WACA ग्राउंड, और पाकिस्तान टीम दौरे पर थी।
सीरीज का पहला टेस्ट मैच चल रहा था,
और माहौल पहले से ही काफी तनाव भरा था।
ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए 180
रन बनाए।
इमरान खान उस समय आग उगल रहे थे—सिर्फ 66
रन देकर 4 विकेट चटका दिए थे।
लेकिन कहानी में बड़ा ट्विस्ट तब आया जब
पाकिस्तान की टीम खेलने उतरी…
दोस्तों, पूरा बल्लेबाज़ी क्रम ताश के पत्तों की तरह बिखर गया।
पाकिस्तान सिर्फ 62 रन पर ऑल-आउट!
एक समय तो स्कोर 26/8 था।
डेनिस लिली बिल्कुल तूफान की तरह
गेंदबाज़ी कर रहे थे—5 विकेट
उन्होंने अकेले ले लिए।
इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में
424 रन बनाए। लक्ष्य पाकिस्तान के सामने था
लगभग असंभव—543
रन।
पाकिस्तान सिर्फ मैच बचाने की कोशिश में था… और यही कोशिश आगे जाकर आग का गोला बन गई।
💥 वो पल
जिसने तूफान खड़ा कर दिया
चौथे दिन की बात है।
जावेद मियांदाद एक रन लेने के लिए
दौड़े। तभी तेजी से पीछे की तरफ भागते हुए डेनिस लिली उनके रास्ते में आ गए।
दोनों की आपस में जोरदार टक्कर हो गई।
इसके बाद जो हुआ, उसने स्टेडियम को आग लगा दी—
➡️ मियांदाद ने गुस्से
में लिली को हल्का-सा धक्का दिया कि "रास्ते से हटें"
➡️
और अगले ही पल…
डेनिस लिली ने पीछे से जावेद मियांदाद
को लात मार दी।
जी हां दोस्तों, गेंदबाज़ ने बल्लेबाज़ को मैच के बीच में किक कर दी!
यही वह पल था जब जावेद का गुस्सा आसमान
पर पहुंच गया—उन्होंने तुरंत अपना बल्ला उठाया और सीधा लिली की तरफ बढ़े।
अगर अंपायर कुछ सेकंड और देर करते,
तो शायद क्रिकेट मैदान पर पहली बार
बल्ला किसी खिलाड़ी पर चल जाता।
अंपायर टोनी क्राफ्टर किसी तरह बीच में
आए।
फिर ऑस्ट्रेलिया के कप्तान ग्रेग चैपल
भी भागकर पहुंचे।
लेकिन गाली-गलौज दोनों तरफ से जारी रही।
अगले दिन की अखबारों में सबसे बड़ी
तस्वीर थी—
बल्ला उठाए हुए, आग-बबूला जावेद मियांदाद।
🔥 स्टेडियम
से लेकर अखबार तक – हर जगह आग
घटना की वीडियो पूरी दुनिया में फैल गई।
पुराने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी तक लिली की
इस हरकत पर बरस पड़े।
लेकिन उनकी अपनी टीम लिली को बचाने में
लगी रही और पूरा दोष जावेद पर डाल दिया।
उधर पाकिस्तान टीम पूरी तरह बिखरी हुई
थी।
कई सीनियर खिलाड़ी खुद अपने कप्तान
जावेद से खुश नहीं थे।
टीम पहले ही खराब प्रदर्शन से दबाव में
थी… और ऊपर से मैदान पर हुई ये शर्मनाक घटना।
⚖️ सज़ा का
ड्रामा – जिसने विवाद और बढ़ा दिया
सबसे पहले लिली पर सिर्फ 200 ऑस्ट्रेलियन
डॉलर का जुर्माना लगाया गया।
ये सुनकर दोनों टीमें भड़क उठीं—
पाकिस्तान बोला ये सजा तो मज़ाक है और
ऑस्ट्रेलिया बोले कि जावेद ने उकसाया।
मामला इतना बिगड़ गया कि ऑस्ट्रेलियाई
बोर्ड को सजा का रिव्यू करना पड़ा।
मीडिया में खबरें चल पड़ीं कि लिली पर
बैन लग सकता है।
लिली ने धमकी दी—
“अगर मुझे सस्पेंड किया गया… तो मैं
तुरंत क्रिकेट छोड़ दूंगा।”
पाकिस्तान मैनेजर एजाज बट्ट ने भी चेतावनी
दी—
“अगर लिली को बचाया गया… तो हमारी टीम
सीरीज बीच में छोड़ कर वापस लौट जाएगी।”
आखिर फैसला आया—
✔️ जुर्माना कम कर दिया
गया
✔️
और लिली को दो वनडे के लिए सस्पेंड कर दिया गया
ना पाकिस्तान वापस लौटा, ना लिली रिटायर हुए।
बाद में दोनों ने सुलह तो कर ली…
लेकिन आज तक दोनों कहते हैं कि गलती
उनकी नहीं थी!
लिली ने 1984 में अपनी किताब में लिखा—
“ये मेरे करियर का ऐसा विवाद है, जिसका मुझे आज भी सचमुच अफसोस है…
मुझे दुख है कि दुनिया भर के बच्चों ने
टीवी पर क्या देखा होगा।”
यह थी
क्रिकेट की सबसे काली घटनाओं में से एक की पूरी कहानी
आज भी लोग पूछते हैं—गलती किसकी थी?
जवाब शायद कभी साफ़ नहीं होगा।
लेकिन इतना जरूर है—
इस मैच ने क्रिकेट को दिखा दिया कि मैदान पर गुस्सा एक सेकंड में खेल को शर्म में बदल सकता है।

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