लॉर्ड्स टेस्ट में जब टीम इंडिया हार की कगार पर थी, तब रविंद्र जडेजा अंत तक डटे रहे। लेकिन अब इस पारी पर रविचंद्रन अश्विन का बड़ा बयान सामने आया है। उनका मानना है कि जडेजा को थोड़ा रिस्क लेना चाहिए था। सिर्फ थोड़ा, बहुत ज़्यादा नहीं। पर साथ ही उनकी बल्लेबाज़ी की तारीफ करते हुए बोले कि जडेजा ने जेनरेशन को सब्र से खेलना सिखाया।
भारत और इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स में खेला गया तीसरा टेस्ट आखिरकार इंग्लैंड की जीत के साथ खत्म हुआ, लेकिन मैच खत्म होने के बाद भी बहस थमी नहीं। सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है रविंद्र जडेजा की उस नाबाद पारी की, जिसमें उन्होंने 181 गेंदों में 61 रन बनाए और अकेले मैच को जिताने की पूरी कोशिश की।
अब इस पारी पर रविचंद्रन अश्विन ने अपनी राय रखी है और कहा है कि जडेजा को थोड़ा रिस्क लेना चाहिए था। मंगलवार, 15 जुलाई को अपने यूट्यूब चैनल पर अश्विन ने बताया कि वो मैच के दौरान एक "बड़े क्रिकेटर" से लगातार बात कर रहे थे नाम नहीं लिया, लेकिन दोनों का मानना था कि अगर जडेजा थोड़ा रिस्क लेते, तो शायद नतीजा कुछ और हो सकता था।
अश्विन ने कहा, “जड्डू ने जिस तरह से खेला, वो कमाल था। जड्डू ने पूरी 'Gen Bold' पीढ़ी को दिखा दिया कि सब्र के साथ भी टेस्ट मैच खेला जा सकता है। लेकिन वो एक मौका ले सकते थे, खासकर जब सिराज के साथ बल्लेबाज़ी कर रहे थे। सिराज बड़े शॉट मार सकते हैं, खासकर लेग साइड पर स्पिनर को। वो बशीर के खिलाफ अटैक करने की प्लानिंग कर सकते थे।”
हालांकि अश्विन ने यह भी कहा कि पिच बिल्कुल भरोसे के लायक नहीं थी। बाउंस और स्पीड का अंदाज़ा लगाना मुश्किल था, ऊपर से फील्डर सभी बैकफुट पर खड़े थे। ऐसे में रिस्क लेना आसान नहीं था। उन्होंने उन एक्सपर्ट्स को भी जवाब दिया जो कह रहे थे कि जडेजा को ज़्यादा इरादा दिखाना चाहिए था।
अश्विन बोले, “ऐसे कई उदाहरण हैं जब बैटर ने रिस्क लिया और सीधा ड्रेसिंग रूम पहुंच गए। जड्डू अच्छा खेले। और मैं मानता हूं कि बेन स्टोक्स की कप्तानी भी ग़ज़ब की थी। उसने कहा, ‘70 रन चाहिए? लो एक रन हर ओवर खेलो और मैच जीत लो’पर यह इतना आसान नहीं था।”
आपको याद दिला दें भारत को इस मैच में दूसरी पारी में जीत के लिए 193 रन चाहिए थे लेकिन पूरी टीम 170 पर ढेर हो गई। आखिरी विकेट के साथ जडेजा नाबाद रह गए, लेकिन जीत उनसे 22 रन दूर रह गई।
एक टिप्पणी भेजें