डेविड ब्लिट्ज़र के नेतृत्व में एक ग्रुप ने 1.78 बिलियन डॉलर (16,660 करोड़ रुपये) की कीमत पर RCB के सभी अधिकार खरीद लिए। उनके 'बोल्ट वेंचर्स' के साथ, इस नए ग्रुप में प्राइवेट इक्विटी फर्म 'ब्लैकस्टोन', 'आदित्य बिड़ला ग्रुप' और 'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया ग्रुप' भी शामिल हैं। उन्होंने पिछले मालिकों, 'डियाजियो' से ये अधिकार लिए। डियाजियो ने 2012 और 2014 के बीच 'यूनाइटेड स्पिरिट्स' से RCB को खरीदा था। तो इस तरह से RCB के मालिक बदले।
इस समय RCB, आईपीएल की सबसे लोकप्रिय टीमों में से एक है। भले ही इसने सिर्फ़ एक ही टाइटल जीता है, वह भी 2025 में, लेकिन इसका फैन बेस कमाल का है और बहुत बड़ा। इसी ने ही तो इस नए ग्रुप को इस, सिर्फ़ एक टी20 टूर्नामेंट में खेलने वाली टीम पर इतनी बड़ी और रिकॉर्ड-तोड़ कीमत वाली डील के लिए जोश दिया।
2008 में शुरु हुआ आईपीएल इस समय, न सिर्फ दुनिया भर में क्रिकेट का सबसे ज्यादा मुनाफ़ा देने वाला इवेंट है, खेलों की दुनिया की सबसे कीमती प्रॉपर्टी में से एक है। तभी तो RCB के लिए अब जो कीमत दी, वह 2021 में नई और आख़िरी बनी आईपीएल टीम 'लखनऊ सुपरजायंट्स' के लिए जो कीमत बीसीसीआई ने ली, उससे भी लगभग दोगुनी है।
इस पूरी चर्चा में, एक बड़ा दिलचस्प सवाल ये सामने आता है कि RCB टीम बनी कैसे थी, बीसीसीआई से तब इसे कैसे और किस कीमत खरीदा था? ये तो तय है कि कागज़ पर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) का मालिक अब या भविष्य में, कोई भी हो, इस टीम को हमेशा 'विजय माल्या की टीम' के तौर पर पहचाना जाएगा। 'रॉयल चैलेंजर्स' नाम उन्हीं की कंपनी के एक प्रॉडक्ट का था। अब, भले ही वह इस फ्रैंचाइज़ी के साथ नहीं लेकिन RCB इतना बड़ा ब्रांड बन चुका है कि नए मालिक भी इसे बदल नहीं रहे और ये टीम RCB ही बनी रहेगी।
अब आपको कुछ ऐसा बताते हैं जिसे जानकार आप हैरान रह जाएंगे। जब 2008 में बीसीसीआई ने आईपीएल के लिए फ्रेंचाइजी अधिकार बेचना शुरू किया तो विजय माल्या के 'यूनाइटेड ब्रुअरीज ग्रुप' की पहली पसंद बेंगलुरु (इस शहर का मौजूदा नाम) की टीम बनाना नहीं था। 11 शहर की टीम बनाने के ऑफर में इस ग्रुप ने 7 शहर के लिए बिड किया जिनमें क्रम से मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली भी थे। इन तीनों शहर के लिए ऑफर 111.6 मिलियन डॉलर का था। जो 4 शहर छोड़ दिए वे कानपुर, अहमदाबाद, जयपुर और कटक थे। इनमें से भी बाद में सिर्फ जयपुर की ही टीम बनी जो इस बात का सबूत है कि बाकी तीनों शहर सभी की पसंद के मामले में, पीछे ही रहे।
मुंबई फ्रेंचाइजी पहली पसंद थी विजय माल्या की। जब 24 जनवरी, 2008 को आईपीएल की 8 टीम बनाने के लिए ऑक्शन हुआ और बिड के लिफ़ाफ़े खोले तो वहां मुंबई के लिए, माल्या मात खा गए रिलायंस से। हैरानी तो की बात की है कि उनका बिड, रिलायंस के ऑफर से सिर्फ 0.3 मिलियन डॉलर (उस समय लगभग 1.2 करोड़ रुपये) कम था। तब ऐसा लगा कि जो हिंदी फिल्म 'त्रिशूल' में टेंडर ऑक्शन में संजीव कुमार की कंपनी के साथ हुआ, वही यहां विजय माल्या की कंपनी के साथ हुआ। रिलायंस वाले 111.9 मिलियन डॉलर के बिड पर मुंबई फ्रेंचाइजी को ले गए।
अब विजय माल्या का यूबी ग्रुप बेंगलुरु और दिल्ली की फ्रेंचाइजी की रेस में सबसे आगे था। वे एक ही टीम बना सकते थे और विजय माल्या ने 'अपने' शहर बेंगलुरु को चुन लिया। इस तरह, जो फ्रेंचाइजी 111.6 मिलियन डॉलर की कीमत पर शुरू में बीसीसीआई से ली गई, वह अब 1.78 बिलियन डॉलर में बिकी।
यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (USL) ने 2012 के आस-पास हिस्सेदारी बेचना शुरू किया और 2014 तक डियाजियो इंडिया ने काफी बड़ा हिस्सा खरीद लिया था और इस बदौलत सब्सिडरी कंपनी रॉयल चैलेंजर्स स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (Royal Challengers Sports Private Limited) भी उन्हें मिल गई। कागज़ पर ये RCB टीम के मालिक थे। तब से तो, RCB की ब्रांड वैल्यू में ज़बरदस्त उछाल आया है जो इसी शहर के लिए डब्ल्यूपीएल फ्रेंचाइजी के जुड़ने से ये और भी बढ़ गई है।
अब ये पूरा पैकेज 1.78 बिलियन डॉलर (लगभग 16,660 करोड़ रुपये) में बिका है। मौजूदा वैल्यूएशन के हिसाब से ये भारत की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स कंपनी है। भले ही मुंबई फ्रेंचाइजी की वैल्यू 2.4 बिलियन डॉलर आंकी गई है, लेकिन बाज़ार में इस वैल्यू की अभी तक कोई परख नहीं हुई है।
जून 2025 में, जब RCB ने अपना पहला टाइटल जीता, तब अनुमान ये लगाया था कि इससे टीम की ब्रांड वैल्यू बढ़कर 140 मिलियन डॉलर से भी ज़्यादा हो जाएगी। एक बात जो अक्सर RCB की बात करते हुए सभी नज़रअंदाज़ कर देते
हैं- वे सिर्फ़ एक क्रिकेट टीम नहीं, एक ब्रांड हैं, एक लाइफस्टाइल हैं। RCB और दूसरी टीमों की तरह सिर्फ़ दो महीने के लिए ग्राउंड पर नहीं आती और उसके बाद गायब, वे पूरे साल सुर्खियों में रहते हैं: जर्सी, मर्चेंडाइज, RCB बार एंड कैफे, भारत में स्पोर्ट्स टेक को बढ़ावा देने के लिए RCB इनोवेशन लैब और 'Hustle by RCB' जैसी फिटनेस कंटेंट पहल सब फैंस को टीम के साथ जोड़े रखती हैं।
यही वजह है कि RCB को खरीदने के लिए 1.78 बिलियन डॉलर का बिड किसी के लिए भी कोई हैरानी की बात नहीं थी।
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