एशेज से पहले मार्नस लाबुशेन ने दी इंग्लैंड को चेतावनी, जोफ्रा आर्चर को लेकर भी दिया बयान

 


ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ मार्नस लाबुशेन ने एशेज से पहले इंग्लैंड और जोफ्रा आर्चर को चेतावनी देने का काम किया है। पर्थ में पहले टेस्ट से कुछ दिन पहले उन्होंने इंग्लैंड की तेज़ गेंदबाज़ी इकाई और खासकर जोफ़्रा आर्चर के बारे में खुलकर बात की। 2019 में आर्चर के साथ अपने ज़बरदस्त मुकाबले के बाद पहली बार दुनिया भर में सुर्खियां बटोरने वाले इस ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ का कहना है कि उस नाटकीय सीरीज के बाद से अब वो किसी भी स्तर पर बेहतर बल्लेबाज़ी कर रहे हैं।

द एज से ख़ास बातचीत में, लाबुशेन ने कहा कि महीनों की कड़ी मेहनत के बाद अब वो अपने खेल पर पूरी तरह से नियंत्रण महसूस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी मौजूदा लय को वर्षों में अपनी सर्वश्रेष्ठ लय बताया, जो ऑस्ट्रेलिया के लिए एक स्वागत योग्य प्रोत्साहन है। आर्चर के बारे में लाबुशेन ने कहा, "वो एक बेहतरीन गेंदबाज़ हैं, 2019 में दोनों टीमों के बीच शानदार मुक़ाबले हुए थे और वनडे क्रिकेट में भी कुछ मौकों पर हमारे बीच कुछ अच्छे मुक़ाबले हुए हैं, लेकिन उनके गेंदबाज़ों को यहां आकर खेलते हुए देखना और ये देखना शानदार होगा कि वो कैसा प्रदर्शन करते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "मुझे अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में आए 18 महीने हो गए हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करना और अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेलना अच्छा रहेगा। मुझे सच में लगता है कि मैं अब पहले से कहीं बेहतर बल्लेबाजी कर रहा हूं। एक बार मुझे ऐसा लगा कि मैं उसी स्तर पर बल्लेबाजी कर रहा था जैसा मैं अभी कर रहा हूं, शायद 2019 एशेज में। जिस आज़ादी और जिस तरह से मैं खेल रहा था और जिस तरह से आगे बढ़ रहा था और कई क्षेत्रों में दबाव बनाने में सक्षम था, उससे ऐसा हुआ।"

उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, "य उसकी गेंद फेंकने की गति, क्रीज पर उसकी गति और शायद क्रीज पर उसकी ऊंचाई है, क्योंकि वो अपने अगले पैर को मोड़ने के बजाय अपनी पूरी ऊंचाई का उपयोग करता है। ये कारक महत्वपूर्ण हैं।"

इस बीच, इंग्लैंड हाल के दिनों में अपने सबसे तेज़ आक्रमण के साथ एशेज में प्रवेश कर रहा है। आर्चर, मार्क वुड, गस एटकिंसन, जोश टंग और ब्रायडन कार्स के साथ पूरी ताकत से वापसी कर रहे हैं और बेन स्टोक्स के भी गेंदबाजी करने की उम्मीद है। ये ऑस्ट्रेलियाई पिचों के लिए बनी एक टीम है, लेकिन इंग्लैंड की बड़ी चुनौती इतिहास से है उन्होंने 2015 के बाद से कोई एशेज सीरीज़ नहीं जीती है और ऑस्ट्रेलिया में उनकी आखिरी सफलता 2011 में आई थी।

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